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निर्लज्ज मीडिया की कपट क्रीड़ा

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ये होना ही है ……..
हरयाणा के रोहतक शहर की बस में एक हंगामा हुआ है, जिसमे दुर्दांत हरयाणा की दो नाबालिग अबलायें दो हट्टे कट्टे जाट युवकों को बेल्ट से पीट रही हैं क्योंकि वो उन दो लड़कियों के साथ छेड़खानी कर रहे थे ….
तमाम मीडिया इस “बाईट” को उछाल उछाल कर बड़े शातिर ढंग से स्त्री सहानुभूति, फ़िल्मी नौटंकी और संवेदनशील विषय का इस्तेमाल अपनी टीआरपी बढ़ाने और अपनी नीच सोच को या देश पर थोपना चाहते हैं … इस स्त्री वाची देश में नौटंकीबाजी के नए रूप दीखते जा रहे हैं और गैरजिम्मेदार, हलके, छिछोरे और निर्लज्ज हरकतें गंभीर विषयों पर हावी की जा रही हैं … आज मोबाइल फोन सबके पास है और हर टीवी चैनल “दर्शक पत्रकार” के नाम पर टोकरी भरके वीडियो इकठ्ठा कर रहे हैं और फिर मजे से उनपर अपनी कलाकारी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं . मीडिया का काम अक्षरो और तस्वीरों को सजाना है, इसमें किसी भी तस्वीर पर कोई भी मनचाहा अक्षर चिपका ये खबर वाले रोज ही मसाला, लगाकर समाचार नहीं घटियापन पेश कर रहे हैं …
रोहतक की बस में कहा जा रहा है की सेना में भर्ती पाये तीन युवकों ने दो लड़कियों को छेड़ा और उसके बाद इन दो लड़कियों ने, जिन्हे १ किलोमीटर दूर स्कूल जाना होता है, बेल्ट से पीटकर महान वीरता का काम किया .. एक बार ये खबर चमकते ही, देश भर के जागरूक, अपनी अपनी स्त्रियों को लेकर अतिसतर्क, महान बुद्धजीवियों, मीडिया महारथी एवं समाज-नारी सेवी अपने अपने हथियार ले जो नौटंकी के औजार हमेशा तैयार बैठे रहते हैं, कूदकर अपनी अपनी नौटंकी क्षमता का प्रदर्शन करने चौखटे पर कूद पड़ते हैं …
वास्तव में तस्वीर का एक ही पहलू नहीं होता, तस्वीर के कई और पहलू होते हैं, किसी अनुशासन, दंड-भय एवं नियंत्रण की अनुपस्थिति में ऐसी तस्वीरों के साथ हर तरह का कमाऊ प्रयोग किया जा सकता है ..आज, मीडिया बेलगाम भेड़िया बन गया है जिसपर कोई लगाम नहीं है और ऐसा होना अवश्यम्भावी था
पर, रोहतक की इस घटना की असलियत सामने आ चुकी है और मीडिया के रंडी-रोने का सच भी सामने है
कुछ प्रत्यक्षदर्शी लोगों के इस घटना के सही संस्करण सामने आ गए हैं, जो मैं सामने रख रहा हु …

अंशूमन रामपुरी
रोहतक कांड के पुरे सच तक जाने बिना उन लड़कियो को सपोर्ट करना सायद गलत होगा

बिलकुल गलत है भाई जी ।ये लड़कियां थाना खुर्द तहसील खरखोदा की हैं। इनकी बस खराब हो गयी तो दूसरी बस में सारी सवारी को ड्राईवर ने बैठा दिया बस का no. था HR-69 6150 . इस बस में ये लड़के बैठे थे इनके पीछे एक बुजुर्ग औरत बैठी थी। तब ये लडकियां बस में सवार हुई और अपने सीट नंबर जो खराब बस में इन्हें मिला था ,के लिए उस बुजुर्ग औरत और इनमे से एक लड़के को उठाने की जिद करने लगी कि ये सीट हमारी है। तब उन लड़कों ने उस बुजुर्ग औरत को न उठने के लिए कहा। फिर भी वो बेचारी इन लड़कियों के तंग करने पर बस में पड़े टायर पर बैठ गयी। तब उन लडको में से एक को भी उठाने लगी तो उन्होने भी इनको भी भला बुरा कहना शुरू कर दिया की गंदे घर की आ जाती हैं कहाँ कहाँ से बड़े बूढ़े का भी लिहाज नही है। गुंडा गर्दी कर रही हैं। वो लड़की बोली अक तुझे हम देख लेंगी ।तब लड़के ने कहा कि नंबर ले ले मेरा अर जब जी करअ तब देख लिए। तब उस लड़की ने अपना फोन एक लड़की को दिया की mms बना इसकी इसी तीसी करके दिखाती हूँ। और बेल्ट निकाल कर मारने लगी। सारी सवारी इनको रोकती रही की मारो मत। अगर उन लड़कों का कसूर होता तो सवारी उनकी सोड सी भर देती ये हरियाणा है। delhi नही है। हम भी बस में सवारी करते हैं। लेकिन सरकार भी अंधी और मीडिया बिकाऊ। उन बेचारों का आर्मी में सिलेक्शन हो गया था जॉइनिंग होनी थी। सब झूठी मीडिया और लड़कियों की वजह से खत्म कर दिया। बिना किसी इन्क्वायरी के सरकार ने वाह वाह लूटने के लिए उस बस के ड्राईवर और कंडक्टर को ससपेंड कर दिया। जब की वो ऐसे बंदे हैं की किसी लड़की के साथ अगर कोई छेड़ खानी करता तो खुद उसको बस से उतार देते थे। वो बुजुर्ग औरत उन लड़कियों के खिलाफ f.i.r करने गयी थी ।पुलिस बोली – ताई इब त उन लड़कियां की चालअगी। भाइयों मन बड़ा कुंठित होता है की इस देश में कानून ,सरकार बिना कीसी छानबीन के गुंडे मीडिया के सहारे चल रहे हैं।

Nelson Singh the so called brave girl herself told that she asked one of her friend in bus to shoot the entire video.so i think this was a planned assault without any intimidation by the boys if d boys had misbehaved or beat her ,the whole indian public in the bus would have beaten the boys to death but they didn’t,clearly it was the girl who made the assault (to take some vengeance) thats why the conductor was acting politely toward girls and boy to stop.public cant beat girls to death(irony )

i know people in cities can be a mute spectator but not in rural/sub urban areas.they didn’t do anything because the girls were in-charge.
Apply some grey matter folks,the whole incident is now politicised, the NGOs are now trying to booby trap the khaps(i don’t see khaps in the video) and want to amend law in favour of such cunning girls,
what a coincidence- the video recording woman is surprisingly pregnant–ooh yes then no authority can blame her why she was filming not helping.
and i don’t see any reports what the boys had said in their defence..
TOI also said the girls were obc and boys were jaats.so the jat boys first sorted out obc girls in bus and then teased,so that media can then blame their mai baap khaps

please media ..stop your one sided reporting..you guys have become too much predictable..
the news traders should leave journalism and start writing scripts for our saans bhi bahu thi nataks ,they can surely revive our daily soap industry..
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इस देश में रंडियों, मीडिया एवं निर्लज्ज स्त्री जाति का एकछत्र राज चलेगा और पौरुष हमेशा अपमानित होगा ……….
इस देश में पौरुष बहुत पहले खत्म किया जा चूका है, ये तो अब पूर्ण प्रत्यक्ष है
कहते हैं, की जहाँ सूरज नहीं होता वहां सीलन पैदा होती है..जहाँ हवा नहीं वहां सड़ांध है.
ये बात पहले ही कही जा चुकी है की अयोग्यों को अधिकार बिना किसी जवाबदेही के दे दिया जाये तो वहां कदाचार फैलेगा ही .. यह देश स्त्री-देह के प्रति बड़ा अनुरागी है, वास्तव में उसका गुलाम है, और इससे समबन्धित हर सूचना के प्रति उसकी हर प्रतिक्रिया एक जैसी होती है, एक ही होती है. हाँ यह हर स्त्री के संरक्षक का स्वाभाविक भय है. पर, इसी भय का दोहन मीडिया अब, रोज रोज बलात्कार, और अब छेड़छाड़ की ख़बरों को उछालकर अपने चैनल का नाम चमकाने में कर रहा है.. जाहिर है, इस गलाकाट प्रतिस्पर्धी युग में जहाँ हजारों चैनल समाचार लूटने को पहला समाचार तोड़ने (ब्रेक) करने को तैयार बैठे हैं वहां अब यही शुरू हो गया है .. पर, रोज ही लगातार ऐसी नीच-नौटंकी होने के बावजूद इसपर कोई मजबूत नियम निर्देश आते दिख नहीं रहे..
आज यह मीडिया तमाम जनता का एकमात्र स्त्रोत बन गया है हर तरह की सूचना एवं मत-मान्यता निर्धारण करने का .. यह अपरिहार्य भी है और अपने ही तरह की अजीब स्थिति के कारण यह बेहद खतरनाक भी बनती जा रही है ..खासकर इसलिए क्योंकि यह मीडिया सरकारों के निर्णय को प्तभवित कर रही है, और सरकारें भी लोकप्रियता की भीख पाने के लिए तुरंत ही नौटंकी का जवाब दूसरी नौटंकी से देती जारही हैं I
अजीब तरीके से, यह देश बिना औरतों के जी नहीं सकता .. हर काम में इन्हे कोई स्त्री जाति चाहिए .. इसी देश में स्त्री के लिए आरक्षण है, स्त्री के लिए अलग बोगी, अलग ट्रेन, अलग बर्थ, अलग बैंक, केवल महिलाओं के लिए बॉर्न्विटा, और न जाने क्या क्या है I हर कदम में औरत की कृपा चाहिए .. अब हालत ये है की स्त्री कदाचार, स्त्री निर्लज्जता, स्त्री अपराध, स्त्री कपट के बाद भी इसका कोई निराकरण सामने दीखता नहीं ..
अब, क्या यह लेख पुरुषों द्वारा किये अपराधों को बढ़ावा देता है ? नहीं …. बल्कि यह कहता है की अपराध किसी का भी हो उसे सजा दो जानी चाहिए ..
अब जरा देखें ये जो मीडिया रोज ही हाँक लगता रहता है छेड़छाड़, महिला असुरक्षा, महिला असमानता इसका असल तथ्य क्या है ?
क्या जब कोई नर या पुरुष किसी मादा या स्त्री को देखता है, उसतक पहुँचने की कोशिश करता है, उसको छूने की कोशिश करता है, उसके साथ आत्मीयता दिखने की कोशिश करता है, या उसपर बलपूर्वक “यौनाग्रह” करता है तो क्या वो उसका अपमान करता है ? क्या एक पुरुष किसी स्त्री किसी भी उम्र की स्त्री पर छींटाकशी, या संगीतमय स्वर -जैसे सीटी का प्रयोग करे तो वो उसका अपमान करने के लिए यह करता है ? जैसा मेरे अन्य लेख में आपको मालूम चलेगा की अगर पुरुष बलपूर्वक भी यौनचेष्टा करे तो वह उसका अपमान करने के लिए नहीं है, नाही यह अपराध है… जीहां, आखिर पूरे जीवजगत में जब से जीवन की उत्पत्ति हुई है इस धरती पर, यही होता रहा है, मतलब लगभग ४-५ अरब सालों से..तो, मात्र कुछ सौ सालों के तथाकथित सभ्य जीवन में जैवविज्ञान के और जीवन की सबसे खालिस तथ्य में कोई अंतर आ जायेगा ?
आखिर, क्यों कुछ मूर्ख स्त्री-पुरुष समानता का ढिंढोरा पीटते रहते हैं ? आखिर क्यों स्त्री “शक्ति करण” की बात उनकी जबान से हटती नहीं ?
स्त्री-पुरुष में मात्र “भोग”* का सम्बन्ध है और कुछ इतर नहीं ..और, यह भोग मात्र पुरुष का निर्णय और बस और बस उसका ही दायित्व है (अन्य लेख में) ..स्त्री मात्र एक जैविक दायित्व के लिए है और वह सम्मान भी पुरुष ही उसे प्रदान करता है ..यह पुरुष का सबसे शक्तिशाली सहज गुण है यह सबसे मूल प्रकृति है .. पुरुष का वीर्यदान उसी स्त्री को “माँ” के महत्वपूर्ण दायित्व के लायक बनाता है .. इसलिए, यौन चेष्टा पुरुष का प्रथम, परम महत्वपूर्ण, महान एवं सबसे प्राकृतिक वृत्ति है … और यह ही स्त्री का सम्मान है I
हाँ, पर समाज के नियम इसे अपराध बनाते हैं ..जब, यह नियम बने थे तब तो यह तार्किक थे पर, अब उनका अतिशय अतिरेक पालन प्राकृतिक नियमों के खिलाफ होने लग गए हैं .. I भारतीयों खासकर हिन्दुओं के स्त्री को शक्ति समझने की मूर्खता पहले से ही हमारी दुर्दशा कर चुकी है और अब इसका आधुनिक अवतार हमें प्रताड़ित करने आ गया है ..
मीडिया में नया नया काम पाये महिलाओं को हर हालत में ताकत पाने का चस्का लग गया है ….
इसलिए, इस मीडिया को मुंह तोड़, चड्डी फाड़ जवाब मिलना ही चाहिए बस, अब बहुत हो गया
१६ दिसंबर का दामिनी निर्भया दिवस बनाकर उसकी उपयुक्त वर्षगाँठ मनाने के लिए मीडिया चैनलों ने कलात्मकता का घिनौना रूप पेश किया है … यही इस मीडिया की असली करतूत है. और इसके जिम्मेदार, चाट पकौड़ी रिमोट लेकर सोफे में धंसे टीवी स्क्रीन की हर चोंचलेबाजी को दम साधे देखते रहने वाले हर नौटंकी, हर मसालेदार अधर्म, अनैतिक चटपटी चीजों को देखने वाले हम हैं !
अब असल सच्चाई ये है की यह मीडिया माध्यम न रहकर अब स्त्रोत और वो भी जहरीली, समाज को प्रदूषित करने वाला स्त्रोत बनता जा रहा है …. और जिस तरह से, जनता इस लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर निर्भर है यह निकृष्टता सामाजिक एवं राष्ट्रीय हितों और प्रजातान्त्रिक आदर्शों के लिए बेहद खतरनाक है I
मीडिया आज हर पहलू की जगह बस अपने ही पहलू को दिखा रहा है, इस घटना में मीडिया ने वीडियो क्लिप के आगे पीछे देखने की या दिखने की कोशिश नहीं की, उन लड़को का पक्ष जानने की कोशिश नहीं की … अगर ऐसे ही ऐरे गैरे, अंडू झंडू अनापशनाप बकवाद समाज की हवा में फैलते रहे तो स्थिति विकट हो जाएगी..
मीडिया बहुत शातिर तरीके से भारतीय मूल्यों पर हमला कर रहा है, उसे भारत के प्राचीन एवं पवित्र मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाने में कोई शर्म नहीं है ..
मीडिया आज हरियाणा की खाप संस्थाओं पर हमला करने का कुचक्र रच रहा है क्योंकि उसे महिलाएं परिवार पर नहीं बाजार में चाहिए. यह बात हमें जाननी चाहिए की ग्रामीण महिला होना, घरेलु स्त्री होना, सामान्य महिला होना कोई अपमानजनक बात नहीं हैं ! रंडियों के महिमामंडन का सिद्धहस्त मीडिया नए स्वांग रच रहा है !
अब, क्या स्त्री का बाहर घूमना मना है ?
जीहां, स्त्री को पुरुष के क्षेत्र में आना बेशक मना है … जिस तरह से खासकर दिल्ली के आसपास क्षेत्रों में लड़कियां किसी वर्जना, किसी नियम, किसी बंधन, किसी मर्यादा का पालन नहीं करतीं.. ये लड़कियां फूहड़, भद्दे, अभद्र, अश्लील, अनैतिक, लुहेड़ी हर तरह की हरकतों में लिप्त पायी जातीं हैं..ये तो पुरुषों से भी आगे हैं, तो फिर इन्हे किस बात की सहानुभूति दी जातीं है ? अगर यह लड़कियां लड़कों के क्षेत्र में घुसती हैं तो उन्हें लड़कों के बर्ताव के लिए भी तैयार होना चाहिए.. बेहद शर्मनाक बात ये है की, लड़कों को स्त्रियों का डर दिखा नपुंसक बना दिया गया है और आज इसकी पराकष्ठा ये है की अब लड़कियां नीचता की हद तक उत्तर गयीं हैं I देखिये, मीडिया कैसे १६ दिसंबर का आंदोलन खड़ा करने का सपना देख रहा था जब इन वीरांगना इन लड़कियों में से एक बोलती है की लड़कों ने उन्हें बस से नीचे उतार दिया था, फिर उनसे छेड़छाड़ करने लगे …. यानि लड़कों ने बस से उतारने के बाद बस में उनसे छेड़छाड़ भी कर डाली !!! बनावटी हिंदी फ़िल्में देखने के आदी भारतीयों को यह मीडिया की दुर्गाएँ अब नाटक कर सच्चाई का धंधा कर रही हैं …. ये शर्मनाक है की इस कपटजाल में फंस लड़कों को जेल में भी डाला गया और उनसे सेना की नौकरी भी छीन ली गयी है, उनका सम्मान गया सो अलग ! सभी जिम्मेदार लोगों खासकर पुलिस, हरियाणा सरकार, समबन्धित मीडिया एवं उस वीडियो बनाने वाली लड़की को सख्त सजा मिलनी चाहिए ! और वोभी तुरंत के तुरंत ! इन नैतिक आतंकवाद फ़ैलाने वालों को सबसे बड़ी सजा मिलनी चाहिए ! ये सोचने वाली बात है की स्त्री सम्बंधित घटनाओं में हरियाणा की खाप पंचायतों का कई बार उल्लेख हुआ है ! मैं अभी खुद हरियाणा में हूँ और अब इसका कारण समझ में आता है की ऐसा क्यों है ? यहाँ की लड़कियां घर-परिवार के सम्मान, या स्त्री जैसे किसी व्यव्हार से कोसों दूर हैं उनमे बदतमीजी एवं आक्रामकता अन्य स्त्रियों से कहीं अधिक है, और इसका कारण भी बहुत गहरा है .. जिस समाज में स्त्री पर नियंत्रण, पर्दा और दंड नहीं है वह अंततः दुर्व्यवस्था, कदाचार, पाप, अनैतिकता एवं विनाश को प्राप्त होता है ! समाज के पौरुष का वर्धन एवं संरक्षण ही समाज की सुरक्षा करता है, इसमें समाज, राष्ट्र धर्म एवं सभी स्त्री-पुरुष की सुरक्षा सम्मिलित है ! ग्रामीण पंचायत, खाप इत्यादि सामाजिक संस्थाओं की बड़ी महत्ता है स्त्री सम्बंधित अपराधों पर रोक के लिए.. स्त्री का सबसे पहला धर्म है अपनी सीमा में रहना उसी से उसका विकास होता है ..यह बात लोगों को पूर्वाग्रहित लग सकती है पर, ये बात मैं पूरे ज्ञान-विमर्श, जिसमे विज्ञानं-उद्भव-वेद-पुराण शास्त्रो का ज्ञान भी निहित है, के आधार पर ही कह रहा हूँ .. स्त्री की उपयोगिता, स्त्री का सम्मान उसके स्त्री बने रहने में है ! और जितना वो पुरुषोचित व्यव्हार से बचे उतना उसके लिए अच्छा .. आक्रामकता पुरुष का एवं समर्पण स्त्री का मूल गुण है ..आक्रामकता से पुरुष एवं मृदुलता से स्त्री के दायित्वों का निर्वाह होता है, स्त्री पुरुष दो धुरी पर स्थित हैं
…………………………….. पर, मीडिया पर सख्त कारवाही होनी ही चाहिए वरना हमें कानून अपने हाथों में लेना पड़ेगा. क्योंकि यह दुष्ट मीडिया सभ्य, शालीन, सही लोगों को अपमानित कर रहा है ..और, राजनैतिक लोग इसमें कुछ नहीं कहते क्योंकि उनको भी मीडिया के सहारे की जरूरत पड़ती है I इसी परस्पर स्वार्थ एवं स्वहित हेतु अनैतिकता को बढ़ावा मिल रहा है ….. स्त्री सशक्तिकरण की नौटंकी बंद होनी चाहिए .
आज महिलाएं कई क्षेत्रो में घुस गयी हैं, मीडिया भले ही इसको चमत्कारिक दिखाए पर है ये अतिक्रमण और जिसपर हमला अवश्य शुरू होगा क्योंकि यह देश स्त्री को एक विशिष्ट रूप एवं मर्यादा में जानती है भेड़िया-दानव नहीं है जो लड़कियों को भागकर उसका शिकार करे. पर, अतिक्रमण वाली महिलाओं, खासकर मीडिया की महिलाओं ने, छेड़खानी को हथियार बना लिया है, किसी भी स्त्री-पुरुष पारस्परिक व्यव्हार को बड़ी आसानी से बलात्कार बना दिया जा रहा है ..इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उत्तेजनात्मकता को अनैतिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है, पुरुषों को डराकर, स्त्री की अवांछनीय जगहों में घुस पैठ करा रहा है. और, आज इसके नए तिकड़म इस्तेमाल किये जा रहे हैं. मीडिया बाजारू दलाल है, वो अपने बाजारू चालबाजी से बाज नहीं आ रहा, और अब वो छोटी लड़कियों को मोहरा बना रहा है .. बलात्कार आज दर्शक खींचने की गारंटी है, स्त्री का उल्लेख होते ही सहानुभूति मिलने लग जाती है, मीडिया का स्तर इससे ऊपर नहीं उठ रहा.
स्त्री सड़क पर फेंकी जानी वाली, बाजार में बेचीं जानी वाली, या गलीज व्यव्हार में सम्मानित की जाने वाली, पुरुषों के बीच स्वयं को साबित करने को विवश किये जाने के लिए नहीं है .. स्त्री स्त्री के रूप में ही सही है . अब, स्त्री का रूप क्या है, स्त्री का धर्म क्या है, स्त्री के लिए समाज पुरुष का धर्म क्या है ….यह भी जानने योग्य है ..और, इसपर विमर्श जल्दी ही प्रस्तुत किया जायेगा ! क्योंकि यह, एक गूढ़ विषय है, यह गहन विमर्श का विषय है .. अज्ञानी, विकट मूर्ख एवं लम्पट (मीडिया) इस बारे में निर्देश नहीं दे सकते .. हमारे महान पूर्वजो का इसमें पूर्व उल्लेखित निर्देश हैं !
सबसे पहले, हरियाणा सरकार को इन बेहूदी लड़कियों को वीरता पुरस्कार बांटने पर माफ़ी मांगनी चाहिए और तुरंत इन लड़कियों और मीडिया के कपट-लीला की जांच और उसपर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ……… किसी भी सरकार एवं जनता को भी ताकीद दी जातीं है की कोई भी मंतव्य बनाने या कार्यवाही करने से पहले, मीडिया की किसी भी खबर पर प्रतिक्रिया देने से पहले हजार बार सोचें और लाखो बार शक करें..सोच समझ कर ही किसी को अपराधी या पुरस्कार के लायक बनायें ………….
धन्यवाद !
शैलेश



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